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शिशॠदेखà¤à¤¾à¤²
शिशà¥à¤“ं का रोना à¤à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है, जो उनके लिठसंचार का बà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¥€ साधन है। à¤à¤• शिशॠरोकर à¤à¥‚ख, बेचैनी, उब या अकेलापन जैसी कई à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं को अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करने की कोशिश करता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ की सिफारिश सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– शिशॠसà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन करते हैं। अगर किसी कारण वश सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ संà¤à¤µ नहीं है तो शिशॠको बोतल से दूध पिलाया जा सकता है जिसके लिठमाता का निकाला हà¥à¤† दूध या फिर डिबà¥à¤¬à¥‡ का शिशॠफारà¥à¤®à¥‚ला दिया जा सकता है।
शिशॠचूसने की à¤à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¤¿ के साथ जनà¥à¤® लेते है और इसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ वो सà¥à¤¤à¤¨à¤¾à¤—à¥à¤° (चà¥à¤šà¥à¤•) से या बोतल के निपà¥à¤ªà¤² से दूध चूसते हैं। कई बार शिशà¥à¤“ं को दूध पिलाने के लिये धाय को रखा जाता है पर आजकल यह बिरले ही होता है विशेष रूप से विकसित देशों में।
जैसे जैसे शिशॠकी आयॠमे वृदà¥à¤§à¤¿ होती है उसे दूध के अतिरिकà¥à¤¤ ठोस आहार की आवशà¥à¤¯à¤•ता à¤à¥€ होती है, कई माता पिता इसकी पूरà¥à¤¤à¤¿ के लिठडिबà¥à¤¬à¤¾ बंद शिशॠआहार (जैसे सेरेलेक) का चयन करते हैं मां के दूध या दà¥à¤—à¥à¤§ फारà¥à¤®à¥‚ला का पूरक होता है। बाकी लोग अपने बचà¥à¤šà¥‡ के आहार की जरूरत के लिठअपने सामानà¥à¤¯ à¤à¥‹à¤œà¤¨ को उसकी आवशà¥à¤¯à¤•ताओं को अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अनà¥à¤•ूलित कर लेते है (जैसे पतली खिचड़ी या दलिया)।
जब तक शिशॠसà¥à¤µà¤¯à¤‚ शौचालय जाने के लिठपà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ होते है, वो लंगोट, पोतड़ा या डाइपर (औदà¥à¤¯à¥‹à¤—ीकृत देशों में) पहनते हैं।
बचà¥à¤šà¥‡ वयसà¥à¤•ों की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में अधिक सोते है पर जैसे जैसे उनकी आयॠबढ़ती है उनके निंदà¥à¤°à¤¾à¤•ाल मे गिरावट आती है। नवजात शिशà¥à¤“ं के लिठ18 घंटे तक की नींद की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। जब तक बचà¥à¤šà¥‡ चलना सीखते हैं उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गोद मे उठाया जाता है। इसके अतिरिकà¥à¤¤ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बचà¥à¤šà¤¾à¤—ाड़ी या पà¥à¤°à¤¾à¤® मे à¤à¥€ बैठा कर या लिटा कर à¤à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ से दूसरे सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर ले जाया जाता है।
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